उस के बग़ैर कैसे काटें तवील ये शब प्यारे सुनो मेरी इक सिगरेट ही जलाओ
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई
Mumtaz Naseem
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मैं न सोया रात सारी तुम कहो बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो
Prakhar Kanha
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जाने क्या कुछ कर बैठा है बहुत दिनों से घर बैठा है वो मधुमास लिखे भी कैसे शाखों पर पतझर बैठा है
Vigyan Vrat
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गर टूटे कोई तारा तो माँगे तुझ को हम इस इंतिज़ार में दस रातें छत पे बीती है
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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इस शाख से तिरी, जिस भी दिन उड़ेगा बुलबुल उस दिन बगीचा तेरा वीरान होना तय है
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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वो इक याद सोने नहीं देती यारों सुनो यार इक आध सिगरेट लाओ
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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उस अल्हड़ लड़की की पहली मोहब्बत था मैं सो मुझ सेे उस का दिल नहीं भरोसा टूटा
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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इक शख़्स हाथ जोड़े खड़ा हुआ था मेरे आगे लेकिन जानाँ, तेरे बा'द किसी के नहीं हुए हम
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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