गर टूटे कोई तारा तो माँगे तुझ को हम इस इंतिज़ार में दस रातें छत पे बीती है
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ज़िक्र हर-सू बिखर गया उस का कोई दीवाना मर गया उस का उस ने जी भर के मुझ को चाहा था और फिर जी ही भर गया उस का
Zubair Ali Tabish
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सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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जिस लड़की के पीछे पागल है दुनिया सारी वो बैठे मेरे सिरहाने गज़लें सुनती है
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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उस के बग़ैर कैसे काटें तवील ये शब प्यारे सुनो मेरी इक सिगरेट ही जलाओ
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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उस अल्हड़ लड़की की पहली मोहब्बत था मैं सो मुझ सेे उस का दिल नहीं भरोसा टूटा
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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घर मेरा जैसे मंदिर था उन के साथ बुलबुल अब उन के बा'द घर मय-ख़ाना बना रखा है
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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आते हुए मिले भी थे तुम किसी से,बोलो सचमुच नहीं तो ख़ुद को बे-पैरहन दिखाओ
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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