इस शाख से तिरी, जिस भी दिन उड़ेगा बुलबुल उस दिन बगीचा तेरा वीरान होना तय है
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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तेरे बग़ैर ही अच्छे थे क्या मुसीबत है ये कैसा प्यार है हर दिन जताना पड़ता है
Mehshar Afridi
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उस अल्हड़ लड़की की पहली मोहब्बत था मैं सो मुझ सेे उस का दिल नहीं भरोसा टूटा
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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उस के बग़ैर कैसे काटें तवील ये शब प्यारे सुनो मेरी इक सिगरेट ही जलाओ
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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जिस लड़की के पीछे पागल है दुनिया सारी वो बैठे मेरे सिरहाने गज़लें सुनती है
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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गर टूटे कोई तारा तो माँगे तुझ को हम इस इंतिज़ार में दस रातें छत पे बीती है
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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बात सारी फिर कभी होगी अभी तो ये बता वो जो बेटा है तिरा, फ़िलहाल दिखता कैसा है
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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