घर पहुँचता है कोई और हमारे जैसा हम तेरे शहर से जाते हुए मर जाते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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राम कथा में जाने वाले लाखों लोग राम के जैसा बनने वाला एक नहीं
Tanoj Dadhich
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मैं तो ऐ इश्क़ तेरी कूज़ा-गरी जानता हूँ तू ने हम दो को मिलाया तो बना एक ही शख़्स
Abbas Tabish
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मुझ को उस की आँखों में कूदने की आदत है मैं तुम्हें बताऊँगा ख़ुद-कुशी के बारे में
Abbas Tabish
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कोई अंदर की घुटन का भी इलाज गालियाँ काग़ज़ पे लिख कर फेंक दे
Abbas Tabish
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क्या तमाशा है कि सब मुझ को बुरा कहते हैं और सब चाहते हैं मेरी तरह का होना
Abbas Tabish
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मैं ने आँखों के किनारे भी न तर होने दिए जिस तरफ़ से आया था सैलाब वापस कर दिया
Abbas Tabish
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