ghar se nikla tha khud-kushi karne rail ke dabbe gin raha hun main
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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मेरी कोशिश तो यही है कि ये मासूम रहे और दिल है कि समझदार हुआ जाता है
Vikas Sharma Raaz
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अभी तो शाम की दस्तक हुई है अभी से लग गया बिस्तर हमारा यही तन्हाई है जन्नत हमारी इसी जन्नत में है अब घर हमारा
Vikas Sharma Raaz
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इरादा तो नहीं है ख़ुद-कुशी का मगर मैं ज़िंदगी से ख़ुश नहीं हूँ
Vikas Sharma Raaz
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एक बरस और बीत गया कब तक ख़ाक उड़ानी है
Vikas Sharma Raaz
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