घाव का दरिया भर गया कब का चाक सीना निखर गया कब का
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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थोड़ा सा जो मैं शातिर हूँ सिर्फ़ तुम्हारी ख़ातिर हूँ
Rohan Hamirpuriya
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नज़रें मिलने का खेल ही तो इश्क़ का पहला बीज ठहरा
Rohan Hamirpuriya
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सब बाहों में झूल चुकी है वो तुझ को कब का भूल चुकी है वो
Rohan Hamirpuriya
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तेरे बिन आबाद है क़ैद से आज़ाद है
Rohan Hamirpuriya
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ये हँसने गाने वाले लोग तस्वीरों में रह जाऍंगे
Rohan Hamirpuriya
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