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तुम्हारे बिन गुज़ारी रात के बस दो ही क़िस्से हैं कभी हिचकी नहीं रुकती कभी सिसकी नहीं रुकती

Ankita Singh

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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह

Jaun Elia

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

Umair Najmi

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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे

Mirza Ghalib

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ये उस की मोहब्बत है कि रुकता है तेरे पास वरना तेरी दौलत के सिवा क्या है तेरे पास

Zia Mazkoor

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