घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए
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जुदा हुए हैं बहुत लोग एक तुम भी सही अब इतनी बात पे क्या ज़िंदगी हराम करें
Nasir Kazmi
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ये हम ही हैं कि किसी के अगर हुए तो हुए तुम्हारा क्या है कोई होगा कोई था कोई है
Irfan Sattar
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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
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अब तो पाँच मिनट के अंदर चेहरे बदले जाते हैं जीवन मिट्टी हो जाता था एक मुहब्बत होती थी
Ali Zaryoun
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लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
Bashir Badr
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हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या
Azhar Iqbal
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कहीं अबीर की ख़ुश्बू कहीं गुलाल का रंग कहीं पे शर्म से सिमटे हुए जमाल का रंग चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
Azhar Iqbal
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न जाने ख़त्म हुई कब हमारी आज़ादी तअल्लुक़ात की पाबंदियाँ निभाते हुए
Azhar Iqbal
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नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द रोटियाँ भी न मुयस्सर हों जिसे काम के बा'द
Azhar Iqbal
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फिर इस के बा'द मनाया न जश्न ख़ुश्बू का लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते
Azhar Iqbal
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