गिराँ थी क़ल्ब-ए-मुफ़क्किर पे खोखली गुफ़्तार इसी लिए तो न ताख़ीर तक चली गुफ़्तार हम अपने दिल का शग़ब दिल में रख के लौट गए कि कर के ख़ुश थे अहिब्बा सड़ी गली गुफ़्तार
Related Sher
फोन भी आया तो शिकवे के लिए फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ रास्ते की मुश्किलें तो जान लूँ आता होगा उस का ठुकराया हुआ
Balmohan Pandey
78 likes
इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान
Javed Akhtar
78 likes
मैं अपने दोनों तरफ़ एक सा हूँ तेरे लिए किसी से शर्त लगा फिर मुझे उछाल के देख
Abrar Kashif
74 likes
ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी
Yasir Khan
75 likes
काम आया तिरंगा कफ़न के लिए कोई क़ुर्बां हुआ था वतन के लिए सोचो क्या कर लिया तुम ने जी कर के दोस्त नस भी काटी तो बस इक बदन के लिए
Neeraj Neer
70 likes
More from Daqiiq Jabaalii
ज़िक्र करता था जो दिन भर उस का हिज्र में मर गया शायर उस का सुनता रहता हूँ पशेमाँ हो कर ज़िक्र जब करते हैं दीगर उस का
Daqiiq Jabaalii
0 likes
ज़ीस्त की सम्त से ताज़ीर बराबर आई पर मुबीं होता नहीं ग़लती हमारी क्या है
Daqiiq Jabaalii
0 likes
वो तो कली से बन गई है अब 'अमित' गुलाब अब तितलियाँ भी बैठती हैं उस के गाल में
Daqiiq Jabaalii
0 likes
शिकायत पर शिकायत कर रहे हो तुम तुम्हें मुझ सेे मुहब्बत हो गई है क्या
Daqiiq Jabaalii
0 likes
तुम कुछ भी कहते रहते हो तुम भी औरों के जैसे हो
Daqiiq Jabaalii
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Daqiiq Jabaalii.
Similar Moods
More moods that pair well with Daqiiq Jabaalii's sher.







