हक़ीक़ी और मजाज़ी शा'इरी में फ़र्क़ ये पाया कि वो जा में से बाहर है ये पाजा में से बाहर है
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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क़ौम के ग़म में डिनर खाते हैं हुक्काम के साथ रंज लीडर को बहुत है मगर आराम के साथ
Akbar Allahabadi
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दावा बहुत बड़ा है रियाज़ी में आप को तूल-ए-शब-ए-फ़िराक़ को तो नाप दीजिए
Akbar Allahabadi
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कोट और पतलून जब पहना तो मिस्टर बन गया जब कोई तक़रीर की जलसे में लीडर बन गया
Akbar Allahabadi
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इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम वस्ल का दिल से मिरे अरमान रुख़्सत हो गया
Akbar Allahabadi
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दिल वो है कि फ़रियाद से लबरेज़ है हर वक़्त हम वो हैं कि कुछ मुँह से निकलने नहीं देते
Akbar Allahabadi
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