हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे हम को भी हालात ने बाहर भेजा है
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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तू अगर ख़ुश है मेरे रोने में मैं वहाँ बैठ जाऊँ कोने में देखते हो ये ईंट का तकिया एक अर्सा लगा भिगोने में
Zahid Bashir
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तुझे ख़याल नहीं है सो हम बढ़ा रहे हैं फिर इक दफ़ा तेरी ज़ानिब क़दम बढ़ा रहे हैं बहुत से आए तुझे जीतने की ख़्वाहिश में हम एक कोने में बैठे रक़म बढ़ा रहे हैं
Zahid Bashir
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सारी रात लगाकर उसपर नज़्म लिखी और उस ने बस अच्छा लिखकर भेजा है
Zahid Bashir
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