सारी रात लगाकर उसपर नज़्म लिखी और उस ने बस अच्छा लिखकर भेजा है
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
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तुझे ख़याल नहीं है सो हम बढ़ा रहे हैं फिर इक दफ़ा तेरी ज़ानिब क़दम बढ़ा रहे हैं बहुत से आए तुझे जीतने की ख़्वाहिश में हम एक कोने में बैठे रक़म बढ़ा रहे हैं
Zahid Bashir
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तू अगर ख़ुश है मेरे रोने में मैं वहाँ बैठ जाऊँ कोने में देखते हो ये ईंट का तकिया एक अर्सा लगा भिगोने में
Zahid Bashir
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हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे हम को भी हालात ने बाहर भेजा है
Zahid Bashir
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