माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Related Sher
तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो अपने हाथों से खिलाया था तुझे तेरी गाली से मुझे याद आया कितने तानों से बचाया था तुझे
Ali Zaryoun
114 likes
ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
117 likes
हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
118 likes
मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
104 likes
वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था मैं ने उस के हाथ चू में और बेबस कर दिया
Waseem Barelvi
101 likes
More from Azhar Iqbal
हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या
Azhar Iqbal
30 likes
कहीं अबीर की ख़ुश्बू कहीं गुलाल का रंग कहीं पे शर्म से सिमटे हुए जमाल का रंग चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
Azhar Iqbal
0 likes
न जाने ख़त्म हुई कब हमारी आज़ादी तअल्लुक़ात की पाबंदियाँ निभाते हुए
Azhar Iqbal
34 likes
हर एक शख़्स यहाँ महव-ए-ख़्वाब लगता है किसी ने हम को जगाया नहीं बहुत दिन से
Azhar Iqbal
32 likes
ये कैफ़ियत है मेरी जान अब तुझे खो कर कि हम ने ख़ुद को भी पाया नहीं बहुत दिन से
Azhar Iqbal
38 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Azhar Iqbal.
Similar Moods
More moods that pair well with Azhar Iqbal's sher.







