hum teri tabiat ko 'khurshid' nahin samjhe patthar nazar aata tha roya to bahut roya
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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तमाम उम्र अकेले में तुझ से बातें कीं तमाम उम्र तेरे रू-ब-रू ख़मोश रहे
Khursheed Rizvi
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कब निकलता है कोई दिल में उतर जाने के बा'द इस गली की दूसरी जानिब कोई रस्ता नहीं
Khursheed Rizvi
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जिन लोगों में रहता हूँ मैं उन में से नहीं हूँ हूँ कौन मुझे अपना ज़माना नहीं मिलता
Khursheed Rizvi
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कभी अपनी आँख से ज़िंदगी पे नज़र न की वही ज़ाविए कि जो आम थे मुझे खा गए
Khursheed Rizvi
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आसाँ तो नहीं अपनी हस्ती से गुज़र जाना उतरा जो समुंदर में दरिया तो बहुत रोया
Khursheed Rizvi
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