हँसते हँसते निकल पड़े आँसू रोते रोते कभी हँसी आई
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अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए
Mehshar Afridi
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सिगरेट की शक्ल में कभी चाय की शक्ल में इक प्यास है कि जिस को पिए जा रहे हैं हम
Ameer Imam
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ये कभी मिलने चले आऍंगे सदियों बा'द भी वक़्त के पन्नों में कुछ लम्हात रख कर देखिए
nakul kumar
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तू उस निगाह से पी वक़्त-ए-मय-कशी 'ताबाँ' की जिस निगाह पे क़ुर्बान पारसाई हो
Anwar Taban
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सितम भी मुझ पे वो करता रहा करम की तरह वो मेहरबाँ तो न था मेहरबान जैसा था
Anwar Taban
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शग़्ल था दश्त-नवर्दी का कभी ऐ 'ताबाँ' अब गुलिस्ताँ में भी जाते हुए डर लगता है
Anwar Taban
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ये यक़ीं है की मेरी उल्फ़त का होगा उन पर असर कभी न कभी
Anwar Taban
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तुम्हें दिल दे तो दे 'ताबाँ' ये डर है हमेशा को तुम्हारा हो न जाए
Anwar Taban
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