हर एक चौखट खुली हुई थी हर इक दरीचा खुला हुआ था कि उस की आमद पे दर यहाँ तक कि बेघरों का खुला हुआ था ये तेरी हम्म ने हमें ही उलझन में डाल रक्खा है वरना हम पर तमाम साइंस के फ़लसफ़ों का हर एक चिट्ठा खुला हुआ था
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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ज़ख़्म इतना किया हरा मैं ने उस में पौधा उगा दिया मैं ने
Saad Ahmad
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इस लिए नहीं रोया अश'आर में वज़्न से बाहर थी मेरी सिसकियाँ
Saad Ahmad
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क्या सितम है, लोग मेरे दुख में भी बस फाइलातुन वाइलातुन देखते है
Saad Ahmad
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मैं अगर दिल की कहूँ दीवार से तो निकल आता है ख़ूँ दीवार से
Saad Ahmad
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और फिर लोग यही कहते फिरेंगे इक दिन यार कल ही तो मेरी बात हुई थी उस सेे
Saad Ahmad
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