और फिर लोग यही कहते फिरेंगे इक दिन यार कल ही तो मेरी बात हुई थी उस सेे
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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ज़ख़्म इतना किया हरा मैं ने उस में पौधा उगा दिया मैं ने
Saad Ahmad
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इस लिए नहीं रोया अश'आर में वज़्न से बाहर थी मेरी सिसकियाँ
Saad Ahmad
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क्या सितम है, लोग मेरे दुख में भी बस फाइलातुन वाइलातुन देखते है
Saad Ahmad
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मुझ को बस उस की ख़ुशियों से मतलब है अर्जुन को बस आँख दिखाई देती है
Saad Ahmad
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हर एक चौखट खुली हुई थी हर इक दरीचा खुला हुआ था कि उस की आमद पे दर यहाँ तक कि बेघरों का खुला हुआ था ये तेरी हम्म ने हमें ही उलझन में डाल रक्खा है वरना हम पर तमाम साइंस के फ़लसफ़ों का हर एक चिट्ठा खुला हुआ था
Saad Ahmad
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