मुझ को बस उस की ख़ुशियों से मतलब है अर्जुन को बस आँख दिखाई देती है
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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काश वो रास्ते में मिल जाए मुझ को मुँह फेर कर गुज़रना है
Fahmi Badayuni
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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इस लिए नहीं रोया अश'आर में वज़्न से बाहर थी मेरी सिसकियाँ
Saad Ahmad
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क्या सितम है, लोग मेरे दुख में भी बस फाइलातुन वाइलातुन देखते है
Saad Ahmad
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ज़ख़्म इतना किया हरा मैं ने उस में पौधा उगा दिया मैं ने
Saad Ahmad
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और फिर लोग यही कहते फिरेंगे इक दिन यार कल ही तो मेरी बात हुई थी उस सेे
Saad Ahmad
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हर एक चौखट खुली हुई थी हर इक दरीचा खुला हुआ था कि उस की आमद पे दर यहाँ तक कि बेघरों का खुला हुआ था ये तेरी हम्म ने हमें ही उलझन में डाल रक्खा है वरना हम पर तमाम साइंस के फ़लसफ़ों का हर एक चिट्ठा खुला हुआ था
Saad Ahmad
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