हर एक रात को महताब देखने के लिए मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना उस को ख़त लिखना तो मेरा भी हवाला देना
Azhar Inayati
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ख़ुद-कुशी के लिए थोड़ा सा ये काफ़ी है मगर ज़िंदा रहने को बहुत ज़हर पिया जाता है
Azhar Inayati
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इस रास्ते में जब कोई साया न पाएगा ये आख़िरी दरख़्त बहुत याद आएगा
Azhar Inayati
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जवान हो गई इक नस्ल सुनते सुनते ग़ज़ल हम और हो गए बूढ़े ग़ज़ल सुनाते हुए
Azhar Inayati
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कभी क़रीब कभी दूर हो के रोते हैं मोहब्बतों के भी मौसम अजीब होते हैं
Azhar Inayati
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