कभी क़रीब कभी दूर हो के रोते हैं मोहब्बतों के भी मौसम अजीब होते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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ख़ुद-कुशी के लिए थोड़ा सा ये काफ़ी है मगर ज़िंदा रहने को बहुत ज़हर पिया जाता है
Azhar Inayati
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वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना उस को ख़त लिखना तो मेरा भी हवाला देना
Azhar Inayati
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इस रास्ते में जब कोई साया न पाएगा ये आख़िरी दरख़्त बहुत याद आएगा
Azhar Inayati
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जवान हो गई इक नस्ल सुनते सुनते ग़ज़ल हम और हो गए बूढ़े ग़ज़ल सुनाते हुए
Azhar Inayati
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हर एक रात को महताब देखने के लिए मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए
Azhar Inayati
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