हर इक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का हर इक तरफ़ को उजाला हुआ दिवाली का
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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मुँह ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द ओ लब-ए-ख़ुश्क ओ चश्म-ए-तर सच्ची जो दिल-लगी है तो क्या क्या गवाह है
Nazeer Akbarabadi
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दोस्तो क्या क्या दिवाली में नशात-ओ-ऐश है सब मुहय्या है जो इस हंगाम के शायाँ है शय
Nazeer Akbarabadi
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है दसहरे में भी यूँँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर' पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है
Nazeer Akbarabadi
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बाज़ार गली और कूचों में ग़ुल-शोर मचाया होली ने दिल शाद किया और मोह लिया ये जौबन पाया होली ने
Nazeer Akbarabadi
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जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब न हो
Nazeer Akbarabadi
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