हँसकर के कितना रोते हैं लड़के भी लड़के होते हैं
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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जिन हाथों से हो कश्मीर बनाते तुम काश उसी से हर तक़दीर बनाते तुम
Shobhit Dixit
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साँप को अपना बनाया जा रहा है आस्तीनों में बसाया जा रहा है
Shobhit Dixit
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तेरी ही यादों में पाकीज़ा होना पड़ता है उस के ख़ातिर भी इन आँखों को रोना पड़ता है तुम को तो बस मेरे ख़्वाबों में आना होता है ये सोचो मुझ को तो रातों में सोना पड़ता है
Shobhit Dixit
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काग़ज़ की नाव बनाते थे और उस पर भी इतराते थे अब तो छुट्टी भर है बस तब दीवाली यार मनाते थे
Shobhit Dixit
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पापा का वो हल्का वाला कुर्ता पहना कंधे पे कुछ भारी भारी सा लगता है
Shobhit Dixit
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