हिज्र के दरमियॉं एहसास हुआ ये हम को वस्ल की मुश्किलें आसान थी कितनी यारों
Related Sher
हमेशा इक दूसरे के हक़ में दुआ करेंगे ये तय हुआ था मिलें या बिछड़ें मगर तुम्हीं से वफ़ा करेंगे ये तय हुआ था
Shabeena Adeeb
87 likes
आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
124 likes
हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
298 likes
कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते
Ahmad Faraz
61 likes
फोन भी आया तो शिकवे के लिए फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ रास्ते की मुश्किलें तो जान लूँ आता होगा उस का ठुकराया हुआ
Balmohan Pandey
78 likes
More from Dhirendra Pratap Singh
प्यार के रस्ते पे मुमकिन नहीं बस प्यार मिले दूर तक कोई सड़क सीधी नहीं जाती दोस्त
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
पहले ही बना लेता दुश्मन तो भी रहती तसल्ली लेकिन उस ने दोस्त बना कर सारे राब्ते तोड़े
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
रौशनी को छोड़ कर आना पड़ा वनवास अपना सब दिए थे ताक में दीपावली हो साथ मिल कर
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
परिंदे उड़ गए पत्तों ने साथ छोड़ दिया शजर का जिस्म दिसम्बर ने फिर निचोड़ दिया
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
उस ने भी रक्खा ऑप्शन की तरह जिस की प्रायोरिटी था बनना हमें
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Dhirendra Pratap Singh.
Similar Moods
More moods that pair well with Dhirendra Pratap Singh's sher.







