परिंदे उड़ गए पत्तों ने साथ छोड़ दिया शजर का जिस्म दिसम्बर ने फिर निचोड़ दिया
Related Sher
परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
283 likes
वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
206 likes
मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
266 likes
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
111 likes
आज तो दिल के दर्द पर हँस कर दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
Zubair Ali Tabish
110 likes
More from Dhirendra Pratap Singh
उस ने भी रक्खा ऑप्शन की तरह जिस की प्रायोरिटी था बनना हमें
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
फोन में हम को सँजो कर रखने वाली दिल में भी रखती तो कितना अच्छा होता
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
उस को दिल में बिठा कर इल्म हुआ है यारों नूर आँखों का नहीं बढ़ता फ़क़त काजल से
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
निभाई पहले ज़िम्मेदारी अपनी फिर उस के बा'द थोड़े शौक़ पाले
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
हर दफ़ा मुँह उतर जाता है ख़ुशियों का जब सजाता हूँ चेहरा उदासी से मैं
Dhirendra Pratap Singh
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Dhirendra Pratap Singh.
Similar Moods
More moods that pair well with Dhirendra Pratap Singh's sher.







