हमेशा याद रखना रेश्मा तुम बताना ग़म! मगर हाँ ख़ामोशी में
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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टूट गए सारे के सारे फूल यहाँ इक मेरे बालों का गजरा होने को
Reshma Shaikh
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मिलेंगी राह में दुश्वारियाँ ग़म और क्या क्या ही मुहब्बत आज़मानी है मुहब्बत कर के देखो तुम
Reshma Shaikh
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तसल्ली कभी तो कभी आस देते ग़रीबी जिन्होंने गुज़ारी नहीं थी
Reshma Shaikh
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घरों में सभी के जले थे पटाखे हमारे ही घर में दिवाली नहीं थी
Reshma Shaikh
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आईने में भी तुम दिखते मुझ में कितने ज़ियादा तुम हो
Reshma Shaikh
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