होंठ तबस्सुम से गीले हैं जानाँ या'नी तुम ने कुछ मीठा सोचा है
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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इशारे में उस ने कहा मुस्कुरा कर इशारे से तुम को इशारा करेंगे
Rohit Gustakh
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तुम्हारी बज़्म हैं तो क्या करोगे इश्क़ को रुस्वा अदब से महफिलें चलती हैं हुक्मों से नहीं चलती
Rohit Gustakh
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इक दुश्मन को साथ रखा है तू ने दुखती रग पर हाथ रखा है तू ने
Rohit Gustakh
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इक गुल को हाथों से छू कर उस ने भँवरों के होंठ गुलाबी कर डाले
Rohit Gustakh
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ये भी मशहूर था कूचे में उस के जिसे तुम लोग पागल कह रहे हो
Rohit Gustakh
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