हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके तुम ने हमें भुला दिया हम न तुम्हें भुला सके
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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इलाही एक ग़म-ए-रोज़गार क्या कम था कि इश्क़ भेज दिया जान-ए-मुब्तला के लिए
Hafeez Jalandhari
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देखा जो खा के तीर कमीं-गाह की तरफ़ अपने ही दोस्तों से मुलाक़ात हो गई
Hafeez Jalandhari
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क्यूँँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँँ दर्द के रोने रोता है अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है
Hafeez Jalandhari
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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं
Hafeez Jalandhari
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मुझे तो इस ख़बर ने खो दिया है सुना है मैं कहीं पाया गया हूँ
Hafeez Jalandhari
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