हम टूट गए यूँँ तो उम्मीद रही लेकिन इस रात अँधेरी को इक भोर से मिलना है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारे नाम का जीवन तुम्हारे बिन न कट जाए चलो तुम छोड़ जाना पर कभी यूँँ ही मिला करना
Avinash bharti
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नहीं नींद आई किसी को बिछड़ कर किसी आँख में फिर लगें ख़्वाब पलने
Avinash bharti
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इश्क़ जैसा कहानियों में है कब हक़ीक़त कोई बनाएगा
Avinash bharti
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किसी की राह तो हैं देखते लेकिन किसी का हम सफ़र होने से डरते हैं
Avinash bharti
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हम टूट गए यूँँ तो उम्मीद रही लेकिन इस रात अँधेरी को इक भोर से मिलना है
Avinash bharti
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