हम टूट गए यूँँ तो उम्मीद रही लेकिन इस रात अँधेरी को इक भोर से मिलना है
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारे नाम का जीवन तुम्हारे बिन न कट जाए चलो तुम छोड़ जाना पर कभी यूँँ ही मिला करना
Avinash bharti
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इश्क़ जैसा कहानियों में है कब हक़ीक़त कोई बनाएगा
Avinash bharti
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नहीं नींद आई किसी को बिछड़ कर किसी आँख में फिर लगें ख़्वाब पलने
Avinash bharti
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ग़म ने उस की रोटी तक है छीन ली खा नहीं पाता कभी वो पेट भर
Avinash bharti
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किसी की राह तो हैं देखते लेकिन किसी का हम सफ़र होने से डरते हैं
Avinash bharti
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