हम ज़रा बेख़याल होते हैं हम सेे जब भी सवाल होते हैं झूठ कहते हुए नहीं डरते लोग कितने कमाल होते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें मैं बस तुम्हारी सम्त रख कर लौट आऊँगा मुझे मालूम है जो दर्द है रस्ता भटकने का
anupam shah
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कुछ दीवारों पर दरवाज़े होते हैं कुछ दरवाज़े दीवारों से होते हैं
anupam shah
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सुलझाऊँ तेरी ज़ुल्फ़ से हाथों की लकीरें ये काम मगर मुझ सेे अकेले नहीं होगा
anupam shah
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या'नी अब उस की मुहब्बत का हलफ़ माँगूँ मैं या'नी अब सुर्ख़ लबों पे मैं सियाही फेंकूँ
anupam shah
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ज़िन्दगी इस तरह ही लुटाता रहा प्यार खोता रहा प्यार पाता रहा एक मंज़र ने यूँँ रोक दी ज़िंदगी बारहा सामने मेरे आता रहा
anupam shah
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