कुछ दीवारों पर दरवाज़े होते हैं कुछ दरवाज़े दीवारों से होते हैं
Related Sher
मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
136 likes
बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
141 likes
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
127 likes
मुझ को भी उन्हीं में से कोई एक समझ ले कुछ मसअले होते हैं ना जो हल नहीं होते
Ali Zaryoun
126 likes
मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
126 likes
More from anupam shah
हँसना-वसना धीरे धीरे कम होगा धीरे धीरे दिख जाएँगे सब चेहरे
anupam shah
1 likes
उस ने वा'दा यही किया मुझ से और फिर भी नहीं मिला मुझ से कैसे दूँगा उसे वही धोखा उस का ज़्यादा है तजरबा मुझ से
anupam shah
0 likes
तुम्हें मैं बस तुम्हारी सम्त रख कर लौट आऊँगा मुझे मालूम है जो दर्द है रस्ता भटकने का
anupam shah
1 likes
बहुत कुछ खो दिया है तब कहीं अब ख़ुद को पाया है मिरी जाँ इश्क़ हो या दुश्मनी अब मैं न बदलूँगा
anupam shah
1 likes
हसीं कुछ ख़्वाब आँखों को कभी सस्ते नहीं मिलते कभी मंज़िल नहीं मिलती कभी रस्ते नहीं मिलते
anupam shah
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on anupam shah.
Similar Moods
More moods that pair well with anupam shah's sher.







