हँसना-वसना धीरे धीरे कम होगा धीरे धीरे दिख जाएँगे सब चेहरे
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बे-दिली क्या यूँँही दिन गुज़र जाएँगे सिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगे
Jaun Elia
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एक नज़र देखते तो जाओ मुझे कब कहा है गले लगाओ मुझे तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे
Zia Mazkoor
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मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
Zubair Ali Tabish
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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होगा कोई ऐसा भी कि 'ग़ालिब' को न जाने शाइ'र तो वो अच्छा है प बदनाम बहुत है
Mirza Ghalib
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वही मंज़र मुझे हर बार नज़र आता है आँख मूँदूँ तो मुझे यार नज़र आता है ऐसे तो मौत का मेरी कोई क़ातिल ही नहीं वैसे हर शख़्स गुनहगार नज़र आता है
anupam shah
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उस ने वा'दा यही किया मुझ से और फिर भी नहीं मिला मुझ से कैसे दूँगा उसे वही धोखा उस का ज़्यादा है तजरबा मुझ से
anupam shah
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चुप रह कर सुलझा पाओ तो ग़ुस्सा होकर मत दिखलाना परदों से गर काम बने तो दीवारों को मत खिंचवाना
anupam shah
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तस्वीर ऐसी आई है कुछ अस्ल में तेरी उलझन भी है राहत भी है कुछ वस्ल में तेरी तू गर डरेगा आज तो तेरा भला होगा पर जान ले जो डर उठेगा नस्ल में तेरी
anupam shah
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कुछ तिश्नगी भी ऐसे मिटती नहीं हमारी हक़ में नहीं समुंदर के प्यास को बुझाना
anupam shah
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