चुप रह कर सुलझा पाओ तो ग़ुस्सा होकर मत दिखलाना परदों से गर काम बने तो दीवारों को मत खिंचवाना
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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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मेरा ख़याल तेरी चुप्पियों को आता है तेरा ख़याल मेरी हिचकियों को आता है
Kumar Vishwas
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क्या तुम तब भी ऐसे ही चुप-चाप तमाशा देखोगे इस मुश्किल में फँसने वाली अगर तुम्हारी बेटी हो
Zia Mazkoor
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रात यूँँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए
Faiz Ahmad Faiz
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अब तो चुप-चाप शाम आती है पहले चिड़ियों के शोर होते थे
Mohammad Alvi
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वही मंज़र मुझे हर बार नज़र आता है आँख मूँदूँ तो मुझे यार नज़र आता है ऐसे तो मौत का मेरी कोई क़ातिल ही नहीं वैसे हर शख़्स गुनहगार नज़र आता है
anupam shah
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उस ने वा'दा यही किया मुझ से और फिर भी नहीं मिला मुझ से कैसे दूँगा उसे वही धोखा उस का ज़्यादा है तजरबा मुझ से
anupam shah
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ज़रूरी है अगर दीवार होना दरमियाँ अपने तो इस दीवार में तुम एक रौशनदान भी देना
anupam shah
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हँसना-वसना धीरे धीरे कम होगा धीरे धीरे दिख जाएँगे सब चेहरे
anupam shah
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कुछ दीवारों पर दरवाज़े होते हैं कुछ दरवाज़े दीवारों से होते हैं
anupam shah
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