हूँ कैसा आदमी संकट में हँसता जा रहा हूँ मैं बुरे हर काम कर के भी सभी को भा रहा हूँ मैं ज़माने भर के दिल को तोड़ के आया हूँ मैं औ अब उन्हीं के दुख को अपना दुख बता कर गा रहा हूँ मैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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ज़िन्दगी की उलझनों की फ़िक्र करना छोड़ कर हम तेरी ज़ुल्फों में उलझने की तमन्ना कर रहे हैं
Alankrat Srivastava
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कंठ में तुलसी की माला माथ पर चंदन तिलक है कृष्ण की वो है दुलारी दिल जिसे मैं दे चुका हूँ
Alankrat Srivastava
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है हर गीत में इस लिए नाम तेरा मैं सूरज-मुखी हूँ तू मेरा सवेरा तेरे साथ सब साफ़ आता नज़र है तेरे बिन था जीवन में पसरा अँधेरा
Alankrat Srivastava
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जलपरी तुम पे तो सारे रंग अच्छे ही लगेंगे पर गुलाबी रंग में तुम और अच्छी लग रही हो
Alankrat Srivastava
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हमें सुन कर नई नस्लें मुहब्बत करना सीखेंगी ग़ज़ल में इसीलिए अपनी उदासी बो नहीं सकते
Alankrat Srivastava
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