कंठ में तुलसी की माला माथ पर चंदन तिलक है कृष्ण की वो है दुलारी दिल जिसे मैं दे चुका हूँ
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कौन कहता है ये दूर मुझ सेे हो तुम तुम सेे रौशन हूँ मैं नूर मुझ सेे हो तुम
Alankrat Srivastava
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ज़िन्दगी की उलझनों की फ़िक्र करना छोड़ कर हम तेरी ज़ुल्फों में उलझने की तमन्ना कर रहे हैं
Alankrat Srivastava
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जलपरी तुम पे तो सारे रंग अच्छे ही लगेंगे पर गुलाबी रंग में तुम और अच्छी लग रही हो
Alankrat Srivastava
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बस ज़रा देर को बाग़ में बैठी वो पेड़ पौधे भी ग़ज़लें सुनाने लगे फूल भी ख़ास भाते न थे हम को पर साथ तुम थी तो काँटे सुहाने लगे
Alankrat Srivastava
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उस पे मरते हो तो उस की ख़ामियों से बैर क्यूँ चाँद के आशिक़ के हिस्से दाग़ तो आएँगे ना
Alankrat Srivastava
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