हुस्न ने शौक़ के हंगा में तो देखे थे बहुत इश्क़ के दावा-ए-तक़दीस से डर जाना था
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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तुम ने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया किस दिल से आह तर्क-ए-तमन्ना करे कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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ये क़त्ल-ए-आम और बे-इज़्न क़त्ल-ए-आम क्या कहिए ये बिस्मिल कैसे बिस्मिल हैं जिन्हें क़ातिल नहीं मिलता वहाँ कितनों को तख़्त ओ ताज का अरमाँ है क्या कहिए जहाँ साइल को अक्सर कासा-ए-साइल नहीं मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है
Asrar Ul Haq Majaz
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मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो तुम्हें क्या ख़ुद मुझे भी ग़म नहीं है
Asrar Ul Haq Majaz
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फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया
Asrar Ul Haq Majaz
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