इक साल गया इक साल नया है आने को पर वक़्त का अब भी होश नहीं दीवाने को
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं सब के दिल से उतर गया हूँ मैं
Jaun Elia
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बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र-ओ-सुकूँ तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
Ibn E Insha
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जो मोतियों की तलब ने कभी उदास किया तो हम भी राह से कंकर समेट लाए बहुत
Ibn E Insha
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हम भूल सके हैं न तुझे भूल सकेंगे तू याद रहेगा हमें हाँ याद रहेगा
Ibn E Insha
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अपनी ज़बाँ से कुछ न कहेंगे चुप ही रहेंगे आशिक़ लोग तुम से तो इतना हो सकता है पूछो हाल बेचारों का
Ibn E Insha
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एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए
Ibn E Insha
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