इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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किस दर्जा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसे हम ज़िंदगी में फिर कोई अरमाँ न कर सके
Sahir Ludhianvi
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बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो बहुत दुख सह लिए मैं ने बहुत दिन जी लिया मैं ने
Sahir Ludhianvi
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अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैं ने
Sahir Ludhianvi
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फ़क़ीर-ए-शहर के तन पर लिबास बाक़ी है अमीर-ए-शहर के अरमाँ अभी कहाँ निकले
Sahir Ludhianvi
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गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से पूछेंगे अपना हाल तिरी बेबसी से हम
Sahir Ludhianvi
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