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इन मकीनों का सुलूक अपनी जगह दर-ओ-दीवार पे हैरत है मुझे

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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा

Allama Iqbal

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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं

Rahat Indori

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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है

Tehzeeb Hafi

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हम इक ही लौ में जलाते रहे ग़ज़ल अपनी नई हवा से बचाते रहे ग़ज़ल अपनी दरअस्ल उस को फ़क़त चाय ख़त्म करनी थी हम उस के कप को सुनाते रहे ग़ज़ल अपनी

Zubair Ali Tabish

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अपनी मुट्ठी में छुपा कर किसी जुगनू की तरह हम तेरे नाम को चुपके से पढ़ा करते हैं

Aleena Itrat

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