sherKuch Alfaaz

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं शायर अपने महबूब के इस अंदाज़ पर हैरान है कि वह बिना किसी हथियार के ही लड़ने चला आया है। यहाँ 'लड़ना' नज़रों के वार या अदाओं का प्रतीक है, जो तलवार से भी ज़्यादा घातक हैं। ग़ालिब कहते हैं कि इस 'सादगी' पर मर मिटना लाज़मी है, जहाँ कातिल यह नहीं जानता कि उसकी सुंदरता ही सबसे बड़ा हथियार है।

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Unknown.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Unknown's sher.