इश्क़ दरख़्त है ऐसा जिस का साया तक भारी सर्दी में भी गर्मी देता है
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी या'नी उन सेे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी
Ateeq Allahabadi
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इश्क़ में ये दावा तो नईं है मैं ही अव्वल आऊँगा लेकिन इतना कह सकता हूँ अच्छे नंबर लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' कि लगाए न लगे और बुझाए न बने
Mirza Ghalib
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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ये समझ में आ गया बेरोज़गारी के दिनों में पैसा है अपनी जगह और दोस्ती अपनी जगह पर
Saahir
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उस की दीवार पे तस्वीर बना रक्खी थी मैं ने ख़ुद पाँव की ज़ंजीर बना रक्खी थी लिखते रहने से मेरा ख़ून निकल आया था उस ने काग़ज़ पे भी शमशीर बना रक्खी थी
Saahir
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तेज़ गिरती धूप देखी तब खुला मुझ पे सिर्फ़ बारिश ही नहीं हैं आसमाँ का दुख
Saahir
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उस की अच्छी बुरी आदतें सारी मालूम हैं मुझ को साहिर चाँदनी संग मैं दाग़ भी मेरे महताब में देखता हूँ
Saahir
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काट लेते हैं उँगली तअज्जुब से दाँतों तले हम जब नई कलियों को फूल बनते हुए देखते हैं
Saahir
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