इस का चारा क्या है तू ही बता ऐ साक़ी जाम जब मुँह से लगता हूँ तो याद आती है
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है इस का मतलब है जा चुके हो तुम
Zubair Ali Tabish
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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तू मुझे फिर ढूंढता रह जाएगा बिनई लिए और इधर ज़िन्दगी के साथ हो जाऊँगा मैं
Parwez Akhtar
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तू ने इतनी भी चोटें नहीं खाई हैं 'अख़्तर' दिल किसी और से तू भी तो लगा सकता है
Parwez Akhtar
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मैं उस के पास में बैठूँ तो इस का सबब पूछता है क्या मैं अपने आप पे एहसान कर नहीं सकता ?
Parwez Akhtar
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वो शम्अ' के मानिंद हर वक़्त जलती रहती थी फिर मैं भी अपनी ज़ात का परवाना हो गया
Parwez Akhtar
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सच बोलने दे ज़ालिम न कर ऐसा सलूक मुझ सेे मेरे ख़्वाब सब हैं टूटे कहीं दिल टूट न जाए
Parwez Akhtar
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