sherKuch Alfaaz

इस लिए भी इस शजर से सब को इतना प्यार है दे रहा है फल अभी ये और सायादार है ऐ ख़ुदा इस ना-ख़ुदा की ख़ैर हो ये नासमझ ये समझता है कि इस के हाथ में पतवार है

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बाक़ी सारे काम भुलाकर इश्क़ किया सुब्ह से ले कर शाम बराबर इश्क़ किया ग़लती ये थोड़े थी इश्क़ किया हम ने ग़लती ये थी ग़ैर बिरादर इश्क़ किया

Vashu Pandey

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ब-जुज़ ख़ुदा के किसी का हम पे करम नहीं है ये कम नहीं है किसी का सजदा जबीं पे अपनी रक़म नहीं है ये कम नहीं है हमारी चुप्पी ये है ग़नीमत वगरना ये जो किया है तुम ने यक़ीन मानो हमारा माथा गरम नहीं है ये कम नहीं है

Vashu Pandey

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इश्क़ क़ैस फ़रहाद रोमियो जैसे ही कर सकते हैं हम तो ठहरे दस से छह तक ऑफ़िस जाने वाले लोग

Vashu Pandey

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इतने कहाँ नसीब कि इस सेे प्यास बुझाएँ खेल करें दरिया हम जैसों को अपने पास बिठा ले काफ़ी है

Vashu Pandey

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आप जो ठीक समझते हैं वो करिए साहब ऐसे मौसम में मैं दफ़्तर तो नहीं आ सकता

Vashu Pandey

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