जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
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रंग की अपनी बात है वर्ना आख़िरश ख़ून भी तो पानी है
Jaun Elia
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मैं न सोया रात सारी तुम कहो बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो
Prakhar Kanha
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नाप रहा था एक उदासी की गहराई हाथ पकड़कर वापस लाई है तन्हाई वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई
Tanoj Dadhich
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उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में
Seemab Akbarabadi
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ख़ूब है इश्क़ का ये पहलू भी मैं भी बर्बाद हो गया तू भी
Jaun Elia
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जो रा'नाई निगाहों के लिए सामान-ए-जल्वा है लिबास-ए-मुफ़्लिसी में कितनी बे-क़ीमत नज़र आती यहाँ तो जाज़बिय्यत भी है दौलत ही की पर्वर्दा ये लड़की फ़ाक़ा-कश होती तो बद-सूरत नज़र आती
Jaun Elia
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कल रात बहुत ग़ौर किया है सो हम उस की तय कर के उठे हैं कि तमन्ना ना करेंगे इस बार वो तल्ख़ी है की रूठे भी नहीं हम अब के वो लड़ाई है के झगड़ा ना करेंगे
Jaun Elia
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कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया में दर्द ग़ुर्बत का साथ देता है जब मुक़ाबिल हों इश्क़ और दौलत हुस्न दौलत का साथ देता है
Jaun Elia
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रह-गुज़र-ए-ख़याल में दोश-ब-दोश थे जो लोग वक़्त की गर्द-बाद में जाने कहाँ बिखर गए
Jaun Elia
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