जाने कितनी कहानियाँ समेटे रहा होगा वो जो शख़्स हाल-ए-दिल बायाँ करता भी नहीं दर्द कितनी होगी, बेचैनी कितनी होगी वो ज़बान जो किसी से कुछ कहता ही नहीं
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होगा कोई ऐसा भी कि 'ग़ालिब' को न जाने शाइ'र तो वो अच्छा है प बदनाम बहुत है
Mirza Ghalib
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा है
Rahat Indori
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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ज़िंदगी का तजुर्बा पूरा नहीं हुआ तू ने जो देखा है पूरा नहीं देखा
Ashish Anand
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आज का दिन भी यूँँ ही बेज़ार किया ना इश्क़ किया, काम किया
Ashish Anand
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चाहूँ तो मालूम हो हर लम्स तेरा हिस्सा मज़ा तो तब है जब तेरी ज़ुबानी हो तेरा क़िस्सा
Ashish Anand
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मैं अपने फूल ले कर किस इलाके में निकल आया यहाँ के लोग तो तरकश को भी गुलदान कहते है जो चक्की चल रही है उस के दोनों पाठ उलटे है जो बे-ईमान है वो हम को बे-ईमान कहते है
Ashish Anand
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