चाहूँ तो मालूम हो हर लम्स तेरा हिस्सा मज़ा तो तब है जब तेरी ज़ुबानी हो तेरा क़िस्सा
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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इश्क़ करना इक सज़ा है क्या करें इश्क़ का अपना मज़ा है क्या करें
Syed Naved Imam
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तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
Sahir Ludhianvi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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ज़िंदगी का तजुर्बा पूरा नहीं हुआ तू ने जो देखा है पूरा नहीं देखा
Ashish Anand
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आज का दिन भी यूँँ ही बेज़ार किया ना इश्क़ किया, काम किया
Ashish Anand
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जाने कितनी कहानियाँ समेटे रहा होगा वो जो शख़्स हाल-ए-दिल बायाँ करता भी नहीं दर्द कितनी होगी, बेचैनी कितनी होगी वो ज़बान जो किसी से कुछ कहता ही नहीं
Ashish Anand
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मैं अपने फूल ले कर किस इलाके में निकल आया यहाँ के लोग तो तरकश को भी गुलदान कहते है जो चक्की चल रही है उस के दोनों पाठ उलटे है जो बे-ईमान है वो हम को बे-ईमान कहते है
Ashish Anand
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