जाँनशीन-ए-इश्क़ हो तो तल्खियाँ अंदर रखो नरमियाँ लाज़िम हैं हुब में सख्तियाँ अंदर रखो
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इशारा कर रहे हैं बाल ये बिखरे हुए क्या तू मेरे पास आया है कहीं होते हुए क्या ये इतना हँसने वाले इश्क़ में टूटे हुए लोग तू इन से पूछना अंदर से भी अच्छे हुए क्या
Kushal Dauneria
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किस ने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर हैं बाहर कौन है
Rahat Indori
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कोई काँटा कोई पत्थर नहीं है तो फिर तू सीधे रस्ते पर नहीं है मैं इस दुनिया के अंदर रह रहा हूँ मगर दुनिया मेरे अंदर नहीं है
Zubair Ali Tabish
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मोहब्बत तो तुम्हें करनी नहीं थी मेरे अंदर का बच्चा मारना था
Anand Raj Singh
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मुस्तक़िल बोलता ही रहता हूँ कितना ख़ामोश हूँ मैं अंदर से
Jaun Elia
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वो इक नदी जो कभी तेज़-तेज़ बहती थी वो आज रेत के मैदान सी बिछी हुई है मैं इक दरख़्त था 'अशरफ़' किसी ज़माने में खिज़ां के कहरस अब ठूँठ ही बची हुई है
Ashraf Ali
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रोज़ खोता हूँ ख़यालों में तुम्हारी जानाँ रोज़ धुँधली हुई तस्वीर उभर आती है
Ashraf Ali
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जो भी मुझ में बाक़ी है गड़बड़ी निकालूँगा चाबियाँ बनाऊँगा, हथकड़ी निकालूँगा ये जो तुम शरीफ़ों को धौंस देते फिरते हो एक दिन तुम्हारी भी हेकड़ी निकालूँगा
Ashraf Ali
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बे-वजह नज़्म-सराई से मुझे क्या लेना तेरी अंगुश्त-नुमाई से मुझे क्या लेना तुझ को पाने की तमन्ना ही नहीं रखता मैं फिर तेरे बाप से भाई से मुझे क्या लेना
Ashraf Ali
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सारी दुनिया को अजनबी कर के ख़ुश हूँ ख़ल्वत से दोस्ती कर के
Ashraf Ali
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