जब ख़ुद को आज़माया है अपने ख़िलाफ़ पाया है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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लोग सब सोच कर अगर बोलें तो हमेशा ही मुख़्तसर बोलें
Taufique Habib
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क्यूँ हिमायत में किसी की हम फोड़ दें आँखें किसी की हम
Taufique Habib
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क्यूँ हिमायत में किसी की हम फोड़ दें आँखें किसी की हम है मुयस्सर अक़्ल तो फिर क्यूँ बातों में आएँ किसी की हम
Taufique Habib
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दीवार दरिया या कहीं सहरा ना हो मुमकिन नहीं के प्यार पे पहरा ना हो जब दूर थे ये दर्द-ए-दिल पैदा हुआ नजदीकियों से फिर ये क्यूँँ गहरा ना हो
Taufique Habib
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इक ताब में गुज़री है ज़िंदगी इक ख़्वाब में गुज़री है ज़िंदगी
Taufique Habib
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