क्यूँ हिमायत में किसी की हम फोड़ दें आँखें किसी की हम है मुयस्सर अक़्ल तो फिर क्यूँ बातों में आएँ किसी की हम
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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लोग सब सोच कर अगर बोलें तो हमेशा ही मुख़्तसर बोलें
Taufique Habib
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क्यूँ हिमायत में किसी की हम फोड़ दें आँखें किसी की हम
Taufique Habib
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दीवार दरिया या कहीं सहरा ना हो मुमकिन नहीं के प्यार पे पहरा ना हो जब दूर थे ये दर्द-ए-दिल पैदा हुआ नजदीकियों से फिर ये क्यूँँ गहरा ना हो
Taufique Habib
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मस्लहत ख़त्म होती है अहमियत ख़त्म होती है
Taufique Habib
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क्या बताएँ क्या-क्या बता चुके सब नया पुराना बता चुके
Taufique Habib
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