मस्लहत ख़त्म होती है अहमियत ख़त्म होती है
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किसी बहाने से उस की नाराज़गी ख़त्म तो करनी थी उस के पसंदीदा शाइ'र के शे'र उसे भिजवाए हैं
Ali Zaryoun
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आज हम दोनों बहुत ख़ुश साथ में रहते कहीं घर बसाने की अगर जल्दी नहीं होती तुम्हें
Tanoj Dadhich
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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अब तो पाँच मिनट के अंदर चेहरे बदले जाते हैं जीवन मिट्टी हो जाता था एक मुहब्बत होती थी
Ali Zaryoun
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उस को अपने पास बिठा लेने से ही धड़कन तेज़ और साँसें भारी होती है 'शाद' तू सब कुछ बढ़ा चढ़ा के कहता है कौन सी लड़की इतनी प्यारी होती है?
Shaad Imran
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ख़्वाब की ख़ातिर ज़मीं ढूँढ़ते हैं आप कहीं हम कहीं ढूँढ़ते हैं
Taufique Habib
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अभी मत आप थक कर बैठिए 'तौफ़िक़' हुए हैं जो नहीं वो हादसे होंगे
Taufique Habib
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दीवार दरिया या कहीं सहरा ना हो मुमकिन नहीं के प्यार पे पहरा ना हो जब दूर थे ये दर्द-ए-दिल पैदा हुआ नजदीकियों से फिर ये क्यूँँ गहरा ना हो
Taufique Habib
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लोग सब सोच कर अगर बोलें तो हमेशा ही मुख़्तसर बोलें
Taufique Habib
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क्यूँ हिमायत में किसी की हम फोड़ दें आँखें किसी की हम
Taufique Habib
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